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मेरे अल्फाज़

देखता हूँ तुम्हें तो

basu harbansh

40 कविताएं

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देखता हूँ तुम्हें तो लगता है जैसा खिल रहा है कमल कोई,
ज़ुबाँ पे आता है नाम तेरा तो लगता है जैसे गुनगुना रहा हूँ गजल कोई,
दूर तुझसे हूँ मगर मुझसे तू दूर नहीं पल पल नजर में मेरे आ रहे हो नजर तू ही,
उतर आई है जो मेरे दिल की गहराई में हाँ ओ है तू ही,
जीवन में मेरे है बस ईक कमी हाँ ओ कमी है तू ही।

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