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मेरे अल्फाज़

चलती हैं जो हवाएं तुझको छूकर

basu harbansh

21 कविताएं

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चलती हैं जो हवाएं तुझको छूकर,
महक़ती हैं फ़िज़ाएं ख़ुश होकर,

झुमते हैं फूल, गुनगुनाते हैं भंवरे,
नाचतीं हैं बहार तेरे पायल की धुन पर,

रंगबिरंगी धरती का रंग,
तेरे पाव जहां पड़े आता है रंग और निखरकर,

चाँद, तारे और नज़ारे, फ़ीका हैं सब तेरे आगे,
तेरा रूप हैं सबसे बढ़कर,

फूलों का है तेरा घर,
तू जीवन का है मधुकर,

जीवन हो तो तेरे संग हो,
जो तू न हो तो क्या करेंगे जी कर।


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