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मेरे अल्फाज़

बरसात

डॉ. अरुण

10 कविताएं

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बना है जो मौसम तो बरसात होगी
मिलन की मिरे-तिरे कभी रात होगी।
तू कितना भी रूठे यकीन है ये मुझको
कभी ना कभी अपनी फिर बात होगी...

-डॉ अरुण निषाद
सुलतानपुर यू पी
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