आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Shayari of Balanath Rai~3

मेरे अल्फाज़

बालानाथ राय की शायरी ~३

Balanath Rai

42 कविताएं

68 Views
आज चौदहवीं की रात है मगर चाँद आधा लगा
उसके चेहरे की चमक के सामने चाँद फिका लगा !!

वो सफ़र भी बहुत खूबसूरत होगी
जिस रास्तों पर तुम मेरे साथ होगी!!

तुम फैलाओ अपनी बाहों का आसमां
मुझे पतंग बनके उड़ान भरना है आज !!

अंधेरे के आगोश में जा रहा हूँ लेकिन
ना नींद मेरी है नाही ख्वाबों से यारी है।

वो दिल में मेरे एक मकान बना के चली गयीं
अगर वो रहती वहाँ तो मैं भी होता अपने पास !!

कभी लफ्जों में ढूंढ़ नहीं पाओगी तुम वजूद हमारा
मैं उतना लिख नहीं पाता जीतना महसूस करता हूँ !!

मेरे मुस्कुराहट की वजह थी कोई दीवानी
जाते जाते कह गयी मुझे मुस्कुराते रहना!!

बात ज़रा सी थी मगर दिल को अच्छा नहीं लगा
तुम्हारा नाम सुना मैंने जब किसी गैर के जुबां से!!

झूठ बेशक कही नहीं होगी उसने!
यूं के सच उसे कहना नहीं आया!!

अगर साथ ना दे सका उम्र भर तुम्हारा
बस इतना याद रखना मैं बेईमान नहीं!!

मुझे लगा था मैं उसे बयां कर सकता हूँ
इक लफ्ज़ भी ना लिख पाया उसे देखकर !!

अगर मेरे जैसे हज़ारों है इस दुनिया में
तो कमी तुम्हारे जैसों की भी नहीं होगी !!

बेवजह मुस्कुराती बहुत हो तुम !
सोचा पूछ ही लूँ खुश तो हो ना तुम !!

तुम्हारी बातें जेहन में कुछ ऐसे है
वो चाय के कप से उठता धुंआ !!

यूं आसमां को ओढ़कर सो जाऊंगा मैं
जमीन का हूँ जमीन का हो जाऊंगा मैं !!

तेरे साए से भी डर लगता है मुझे
जब छूकर गुजरती जाती है मुझे !!

मैं सुकून की तलाश में आया था तेरे करीब !
आँखों में बेचैनियों को समेटकर जा रहा हूँ!!

गुनाह तुम भी करते हो, ग़लत हम भी करते हैं
खुदा तुम भी नहीं हो, भगवान हम भी नहीं है !!

एक वक़्त था जब नींद आ जाती थी आंखों में
अब तो आंखें ढूंढती है रात रात भर नींद को

उसने काहा ख़ामोशी भी एक नशा है
तो नशा करने लगा हूँ आजकल मैं भी

आँखों में एक ख़्वाब सा क्यूं है!
दिल भी ये बेताब सा क्यू है!!

~बालानाथ राय
शेरपुर कलाँ,गाज़ीपुर,उत्तर-प्रदेश

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!