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मेरे अल्फाज़

जिन्दगी का सबसे सुहाना पल

Balanath Rai

42 कविताएं

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जिन्दगी का सबसे सुहाना पल था
मेरा निराला स्कूल में आना
पहले लगा हाय ! कहाँ आ गया?
एक से सात तक का
सफर था बड़ा सुहाना
कभी फर्स्ट कभी सैकण्ड
फिर ऐसी ही सारी क्लासेज
सबसे पहली थी एक क्लास जिसकी कमाण्ड थी-
कृष्णकान्ति और वर्मा मैडम के पास।
सिखाया इन्होंने ही पेन्सिल पकड़ना
इनकी बदौलत आया शब्दों को जकड़ना।
बात ये अच्छी तरह याद है मुझे
एक मर्तबा मैंने पूछा इनसे
सर, ये कहाँ से आया दो?
खीचे कान और कहा--बालानाथ
एक और एक को जोड़ो और बना "दो"
दिन यूँ ही बीत गया साल था--2009
और मेरी क्लास थी फोर
नए चेहरे थे मेरी नजरों में
और वर्मा मैडम थी खबरों में
सुना था इनमें गजब का है जोश
पर यकिन हुआ जब जाना कि मुट्ठी में है इनकी हिन्दी शब्द कोश

~बालानाथ राय

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