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Baki hai

मेरे अल्फाज़

बाकी है

अमर संदीप

8 कविताएं

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नयन की प्यास बाकी है
मिलन की आश बाकी है
मुहब्बत है तो कह तो अब
या अब भी क़ाश बाकी है

कितना तन्हा हूँ तुम-बिन मैं
कितना टूटा हूँ तुम-बिन मैं
जरा छूकर मुझे देखो
क्या मुझमे साँस बाक़ी है

- अमर संदीप

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