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Dil aakhir tu Kyu rota hai ?

मेरे अल्फाज़

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?

Bajrang Prasad

1 कविता

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दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?

कुछ अपने ही तो छूटे हैं, कुछ सपने ही तो टूटे हैं,
अपने, सपने को पाने में, हम खुदा से भी तो रूठे हैं,
मतलब की इस दुनिया में तू ऐसे सपने क्यूं संजोता है ?

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?

जब धड़कन ही रुक जाना है, फिर क्या खोना क्या पाना है ?
साँसों में बसा हो भले कोई, सब छोड़ यहीं पर जाना है,
कोशिश कर ले चाहे जितनी, जो लिखा वही ही होता है...

दिल आखिर तू क्यूं रोता है ?

कुछ यादें ही तो छूटी हैं, कुछ रश्में ही तो टूटी हैं,
कुछ वादों से ही मुकरे हैं, कुछ कसमें ही तो झूठी हैं,
ये कसमें, वादे, प्यार और रश्में, सब सपनों में होता है...

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?

अश्क़ों संग सावन भी बरसा है, 'बजरंग' का भी अंतर्मन तरसा है,
'काजल' आँखों से बह ही रही, फिर क्यों गालों पर हर्षा है,
तुम एक अकेले जल न रहे, 'उसका' दिल भी न सोता है..

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है ?

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