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मेरे अल्फाज़

राधे सांवरिया

Babu Lal

107 कविताएं

30 Views

. *राधे- सांवरिया*
. 👀👀
जब तक तन में श्वाँसे चलती।
विरह विपद में कान्हा भजती।
हम वृष तनुजा हे साँवरिया।
पर सचमुच कान्हा तू छलिया।
. 👀👀
दिन भर मन में आहें भरती।
हम सब सखियाँ कान्हा तकती।
अब कुछ हँसले प्यारे सजना।
फिर नटवर तू राधे भजना।

. 👀👀
गिरधर सब की बातें सुनते।
पर निज मनमानी ही करते।
तट तरु वन में ढूँढा़ करते।
पर तुम मन राधा के बसते।
. 👀👀
✍©
बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा, 303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
👀👀👀👀👀👀👀

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