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मेरे अल्फाज़

बावरा मन

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बाबरा है तेरा मन
तेरे मन का मोल लगाता है
तू है उसका दर्पन
वो तुझ को ही बहलाता है

बाबरा है तेरा मन
ये तुझे धोखा दिलाता है
तू है उसका दर्पन
ये तुझ पर इल्जाम लगाता है

बाबरा है तेरा मन
अपनी नजरों में झुकाता है
तू है उसका दर्पन
अपनी बात नहीं बताता है

बाबरा है तेरा मन
जितना तू इसे समझाता है
तू है उसका दर्पन
तुझे तुझसे दूर ले जाता है

बाबरा है तेरा मन
तुझे तुझ से हराता है
तू है उसका दर्पन
ये तेरे मन का मोल लगाता है..

#भारद्वाज दिलीप


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