आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Ghazal

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल- मुहब्बत ऐसा मसला है जो दिल पर छोड़ देना तुम

225 Views
मोहब्बत ऐसा मसला है जो दिल पर छोड़ देना तुम
अगर बोझिल सा हो जाए तो रिश्ता तोड़ देना तुम ।1|

कि देखो हर दयारो दर पे ला इल्मी का आलम है
हो दस्तक इश्क़ की दर पर खुला घर छोड़ देना तुम |2|

ख़ुदा का नाम लेने से इबादत हो नहीं जाती
कि शफ़क़त भी इबादत का अमल अब जोड़ देना तुम |3|

ज़माने में मची कैसी ये देखो जंगो रंजिश है
किसी दिल को बना कर घर ज़माना छोड़ देना तुम |4|

ये जो लंबी सी है फ़िहरिस्त तेरी ख़्वाहिशातों की
ख़्वाहिश इक टूट जाए तो नयी सौ जोड़ देना तुम |5|

ख़ुदा ने ज़ब्त बख़्शा है तो फिर ये बेबसी कैसी
ख़ुदा हर हाल का हाकिम ख़ुदा पर छोड़ देना तुम |6|

तुझे किस बात का है डर जहां से ऐ मेरी 'ख़्वाहिश'
किसी भटके परिंदे को हसीं सा मोड़ देना तुम |7|

© ख़ुशबू पाण्डेय 'बावरी ख़्वाहिश'


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!