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मेरे अल्फाज़

समय का चक्र

Ayushi Rastogi

1 कविता

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कोई एक कहानी नहीं हूँ मैं,
सालो साल का इतिहास हूँ
एक पन्ना नही हूँ मैं,
सदियो से लिखी जा रही एक किताब हूँ
इन पन्नो में कुछ कहावते है, तो कुछ शिकायते है
कुछ बेह्ह्रुखियान हैं, तो कुछ रिवायते भी है
पर सिर्फ़ नाराज़ीगियाँ नही है इस दास्तान में,
कुछ चाहतें और कुछ आशिक़ाना मिज़ाज़ भी हैं
आग में सुलगतें हुए ख्वाब भी है
सुबह की पहली रोशनी जैसी मुस्कुराहट है,
तो एक नई कलि जैसी मासूमियत भी है
यह मिट्टी की वो सुगंध है,
जो हर बार बारिश के साथ लौट के आती है
यह ऐसी एक नदी है,
जो चुप छाप सागर में समा जाती है
लाख़ों लिखो तुम कहानियाँ,
पर उनमें वो बात नही है
एक पल में मिट जाए,
ऐसी कमज़ोर यह कहानी नही है

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