आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   MILNA MUNASHIB NA HOGA.
MILNA MUNASHIB NA HOGA.

मेरे अल्फाज़

मिलना मुनासिब न होगा

Awadhesh Kumar

11 कविताएं

186 Views
अब मिलना मेरा तुझ से मुनासिब न होगा.
वो घड़ी, वह मंजर हमसे हम नसीब ना होगा.
कैसे-कैसे कुदरत हमसे जो मुंह मोड़ लिए.
अब इस फिजा में उनसे राफ़्ता ना होगा.
बन कर श़जर की लता मेरे तन में लिपट गए.
अब हौसले की ख्वाहिशों का कोई वास्ता ना होगा.
यह बरस कर घटा कुछ ऐसे हमसे बिखर गई.
अब बरसना भी उसका इस फ़िजा में मुनासिब ना होगा.
तेरे मेरे दरमियान कुछ मौसमों का फासला है.
इस सावन आपसे लगता मेरा राफ़्ता ना होगा.
कुदरत ने हमें आपस में मिलाने की पुरजोर कोशिशे की है.
अब दिल से दिलदार का कोई वास्ता ना होगा.
बरस चुका मौसम जहां मोहब्बत की तरावट थी कभी.
सूखे दिल पर इश्क की नमी का वास्ता न होगा.
मिलना मेरा तुझसे मुनासिब न होगा.
अब इस सावन आपसे लगता मेरा राफ़्ता ना होगा।


अवधेश कुमार राय
धनबाद झारखंड

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!