आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   MILNA MUNASHIB NA HOGA.
MILNA MUNASHIB NA HOGA.

मेरे अल्फाज़

मिलना मुनासिब न होगा

Awadhesh Kumar

36 कविताएं

194 Views
अब मिलना मेरा तुझ से मुनासिब न होगा.
वो घड़ी, वह मंजर हमसे हम नसीब ना होगा.
कैसे-कैसे कुदरत हमसे जो मुंह मोड़ लिए.
अब इस फिजा में उनसे राफ़्ता ना होगा.
बन कर श़जर की लता मेरे तन में लिपट गए.
अब हौसले की ख्वाहिशों का कोई वास्ता ना होगा.
यह बरस कर घटा कुछ ऐसे हमसे बिखर गई.
अब बरसना भी उसका इस फ़िजा में मुनासिब ना होगा.
तेरे मेरे दरमियान कुछ मौसमों का फासला है.
इस सावन आपसे लगता मेरा राफ़्ता ना होगा.
कुदरत ने हमें आपस में मिलाने की पुरजोर कोशिशे की है.
अब दिल से दिलदार का कोई वास्ता ना होगा.
बरस चुका मौसम जहां मोहब्बत की तरावट थी कभी.
सूखे दिल पर इश्क की नमी का वास्ता न होगा.
मिलना मेरा तुझसे मुनासिब न होगा.
अब इस सावन आपसे लगता मेरा राफ़्ता ना होगा।


अवधेश कुमार राय
धनबाद झारखंड

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!