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मेरे अल्फाज़

राम अब कहां रहते हो?

Avinash SP

1 कविता

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राम अब कहाँ रहते हो?
अयोध्या भी तुम्हारा
मस्जिद भी तुम्हारा
सरयू नदी भी तुम्हारी
अब बता तो राम कहाँ रहते हों?

बरसो पहले पता दिया था तुमने
आना इस नगर में
मिलेंगे सुन्दर विचार के लोग
और मिलेंगे मेरे मंदिर ऊंचे ऊंचे

कुछ समय पहले आना हुआ था
बहुत खोजे पता तुम्हारा
आगे चल कर मिला खंडहर
नाम ना थे वहां ऊंचे
कुछ पत्थर और ईट
राम, वहां था नाम तुम्हरा
बहुत खोजे नहीं मिला मंदिर ऊंचे ऊंचे
राम अब तो बता दो कहाँ रहते हों?

सत्ता तुम्हारी
राज्य तुम्हारा
अब तो बनवा लो
अपने मंदिर ऊंचे ऊंचे
साख तुम्हारी रहती हैं
अब तो सब लबों पर
बात तुम्हारी रहती हैं
कुछ काम करालो
कुछ अपने नाम करा लो
अब बहुत हों गयी बाते ऊंचे ऊंचे..
राम, मेरे राम
अब तो बतला दो
कहाँ रहते हों?

अगली बार उसी पते पर आऊंगा
नाम तुम्हारा देखने
उसी मंदिर पर
जिनके शिखर हों ऊंचे ऊंचे.
राम, हे मेरे राम
उस दिन बतला देना
कहाँ तुम रहते हों......?

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