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मेरे अल्फाज़

हिंदी ग़ज़ल

Avinash Beohar

173 कविताएं

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वो कोई जांबाज नहीं है।
मधुऋतु के सिर ताज नहीं है।।

जो बातें हैं वो कल होंगी,
ऐसे लम्हें आज नहीं है।

वर्षा का स्वागत है दिल से,
नभ से गिरती गाज नहीं है।

जो होता है खुल्लम खुल्ला,
कोई किस्सा राज नहीं है।

कोयल अमराई में गाती,
कर्कश स्वर का बाज नहीं है।

अविनाश ब्यौहार
जबलपुर

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