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Hame itna na tadpao ki ham majboor ho jayen..

मेरे अल्फाज़

हमें इतना ना तड़पाओ कि हम मजबूर हो जाएं

Atul Pathak

34 कविताएं

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अगर हम मिल नहीं सकते चलो फिर दूर हो जाएं
खुशी को ताक पर रखें ग़मों की जद में खो जाएं
तुम्हें हम भूल ना सकते हैं ये सच है मगर फिर भी,
हमें इतना ना तड़पाओ कि हम मजबूर हो जाएं।।

यशस्वी हूं पराजित सा धमक मीठी सी अब भी है
अखंडित हूं विभाजित से कसक मीठी सी अब भी है
बहुत दिन-रैन हैं बीते मगर उस शर्ट में अब तक,
गले तूने जो लगाया था महक मीठी सी अब भी है।।

वो मेरा अपना है फिर भी मुझे बेगाना लगता है
समां के आगे जो जलता है सब परवाना लगता है
यकीं तुम भी करो जानम नहीं आसान है इतना,
वो एक पल भुलाने में मुझे सारा जमाना लगता है।।

मैं जिसकी खातिर जिंदा हूँ वो मुझमे जिंदा रहता है
मेरी नजरों में राजा है, खुद में शर्मिंदा रहता है
जीवन की सारी खुशियां हैं दिल फिर भी बेचैन बड़ा,
तेरी यादों के पिंजरे में एक आज़ाद परिंदा रहता है।।

- अतुल उवाच

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