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मेरे अल्फाज़

देश की शायरी

Ashwani Singh

1 कविता

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अंदाज ए आलम बदल रहा है खबर नहीं तुमको
सूरज पश्चिम से निकल रहा है खबर नहीं तुमको
किसी को अमानत के इत्तलाफ़ का डर सता रहा है
कोई अफ़साने लिख रहा है खबर नहीं तुमको

हर रोज इत्तिहाद हो रहा है , कही हर रोज इनाद हो रहा है
सत्ताधरियो ने हमको तोड़ रखा है खबर नहीं तुम को
उजड़ रहा है चमन से गुलिस्तां
मेरा मतलब हिंदुस्तान खत्म हो रहा है
खबर नहीं तुमको


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