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मेरे अल्फाज़

काश मैं पक्षी होता

Ashutosh Yadav

1 कविता

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अगर काश मैं पक्षी होता ,
नभ-समंदर में चुग कर आता ।
ना कभी सताते जल-कीच मुझे भी ,
ना अटक नैन का तारा बनता ।

भोर सुबह में निकला सूरज ,
तो उसे हराकर मैं जग ही जाता ।
ना कटीले बोल को तुम सुन पाते ,
ना दर्द दिलों को मैं देकर जाता ।

अगर काश मैं पक्षी होता ,
ना कभी इंसान सा बनना चाहता ।
जो मिलती बुद्धि-वरदान मुझे तो ,
हर पशु लज्जित कर घमंड ही आता ।

अगर काश मैं पक्षी होता ,
ना खुदा का भेद मैं खुद कर पाता ।
आँगन-मस्जिद में सुबह गुजरती ,
तो शाम बसेरा मंदिर बन जाता । ।


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