आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Tiranga

मेरे अल्फाज़

तिरंगा

Ashutosh Kumar

23 कविताएं

72 Views
तिरंगा
---------
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा
गणतंत्र दिवस पर
जोश बढाए तिरंगा।

तेरे नीचे नतमस्तक हैं
देते सभी सलामी
तेरे रक्षा की खातिर
हँसते-हँसते देते कुर्बानी
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा।

शौर्य शांति हरित क्रांति
का प्रतीक तिरंगा
उजला हरा केशरिया
सभी के रगो में समाया तिरंगा
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा।

स्वच्छता सौम्यता
आदर्शों से भरा तिरंगा
राष्ट्रवाद का जोश बढाता
मातृभूभि का श्रृंगार तिरंगा
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा।

शान है इसके कभी न रूके
ऐसे विचार लाये तिरंगा
बूरी नजर जो इस पर डाले
पलभर में औकात दिखाये तिरंगा
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा।

कभी न थकते, कभी न रूकते
हाथो में जब आ जाए तिरंगा
अभिलाषाएँ जगा जातीं
कफन के बदले मिल जाये तिरंगा
लहराये तिरंगा
मंजिल की ओर
बढाए तिरंगा।
आशुतोष
पटना बिहार

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें

 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!