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मेरे अल्फाज़

देशभक्ति

Ashutosh Kukrety

45 कविताएं

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हो सके तो यह देशभक्ति हमेशा ऐसी रहे,
ना हो एक दिन की बस हमेशा ही खिलती रहे।
एक दिन झंडा उठाने की ही बस बात ना हो,
इस झंडे की गरिमा भी हमेशा ऊंची रहे।
वतन के लोग देशभक्ति ना बस एक दिन की हो,
दिलों में भाव भक्ति का, हमेशा ही जिंदा रहे।
हो प्यार उस हर जीव से, जिनसे ये भारत बना है,
हर एक पादप, वृक्ष से, जिनसे ये भारत सजा है।
कश्मीर क्या कन्याकुमारी, दोनों में एक भाव हो,
हिन्दू और मुस्लिम ना हो, बस एक भारतवर्ष हो।
मस्जिदों में राम हो, और मन्दिरों में हो खुदा,
इंसान बस इंसान हो, ना हो आपस में जुदा।
जात हो ना पात हो , बुध सा समभाव हो,
प्रेम हो चारो तरफ, दुख - द्वेष का अभाव हो।
आशुतोष कुकरेती 


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