आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Kashmakash

मेरे अल्फाज़

कश्मकश

Ashok Kumar

19 कविताएं

11 Views
करो मजबूत अपने दिल को कि मैं अब जाने वाला हूं
मत करो रोकने की व्यर्थ कोशिशें कि मैं तो मौत का निवाला हूं
बहुत पाए हैं मुक़ाम मैंने बड़ी मंजि़लें भी जीती है
बहुत कुछ छूट भी रहा जिंदगी में शायद
ही कुदरत की नीति है
करो मजबूत अपने दिल को 
कुछ भी तो नहीं रुकने वाला एक मेरे चले जाने से
करेंगे सहयोग मेरे सब लोग रो रो कर मुझे जलाने में
जब जब खुशियों के गीत मेरे घर में गुनगुनाये जायेंगे
न होगी कोई कमी मेरी न हम किसी को याद आएंगे
करो मजबूत अपने दिल को के 
देख कर दुनिया के बेदर्द तौर मै भी पछताऊंगा
जब बिना किसी मुरौवत के खाली हाथ अनंत में जाऊंगा
सोच कर सुनहरे कल की यादें साँस अंतिम नहीं ले पाउँगा
दीवारों पे लगी तश्वीरो में जब अपने वजूद को लिपटा हुआ पाउँगा
करो मजबूत अपने दिल को के

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!