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मेरे अल्फाज़

अहसास

Ashok Kumar

19 कविताएं

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अब बुझी हुई लकड़ियों में चिंगारी क्यों ढूंढते हो
क्या रास नहीं आयी रक़ीबो की चाहत जो मेरे दिल में मुहब्बत टटोलते हो
हम तो आज भी है इंतजार में उनके जो किसी के लिए हमें छोड़ गए
एक आप है की पछतावे के दो आँशु बहाने में भी बहाने ढूंढते हो

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