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मेरे अल्फाज़

तुझे हुआ क्या है ?

Ashok Havaldar

28 कविताएं

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तुझे हुआ क्या है?

कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

रुकने का नाम ही,
नहीं ले रहे हो.
कितनी ज़िद करते हो?
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

कितना हंगमा कर दिया,
सब को परेशान किया.
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

पानी तो जीवन है ना?
हर शख़्स ख़ुद को क्यों,
बचा रहा है?
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

नदी किनारे बस्ती करना,
क्या गलती कर दी मानव ने?
बाढ़ ने पानी पानी कर दिया.
जीना हराम कर दिया.
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

इतना ही बरस की,
प्यास बुझेगी, खेती खिलेगी.
पशु, पक्षी, हर जीव,
ख़ुश रहेगा.
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना भी ना बरस,
खौफ़ से तेरी राह देखना,
छोड़ दे.
कहो, कहो ना ऐ बारिश,
इतना क्यों बरस रहे हो?
तुझे हुआ क्या है?

आखिर,
बारिश हंस हंस कर के बोली.
उस धरती की प्यास है बुझानी.
जरा आंगन में रुकने दो.
मुझे बरसने दो.

काग़ज़ की किश्तियां छोड़ो
जरा मजे भी ले लो.
धरती को खोजना ही
मुश्किल कर दिया तुम ने.
मुझे बरसने दो.

जरा सोच ऐ मूर्ख, जरा सोच.
मुझे बरसने दो.
धरती की प्यास बुझाने दो.

-- अशोक हवालदार, बंगलोर


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