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What if, U love me

मेरे अल्फाज़

तुम भी साथ होते तो ताज फिर पत्थर होता

Ashish shukla

5 कविताएं

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काश तुम भी साथ होते
तो ताज फिर पत्थर होता
और तुम मेरी मुमताज़....

काश तुम हाथ देती
तो सफर सिर्फ मंजिल होता
और तुम मेरी रग़बत....

काश तुम सब्र करती
तो शब में होती उल्फ़त
और इश्क हमारा फराज़...

काश मैं तेरा जिस्म होता
तो ज़िन्दगी मरकज़ होती तुम तक
और चेहरा सिर्फ नकाब....

काश तुम, चादर साथ होते
तो बिस्तर होता सिर्फ सहारा
और सांसें हमारी बातें...

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