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मेरे अल्फाज़

शायरी

Ashish Pandey

118 कविताएं

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भले ही तू हुस्न का ताज पहने घूमती है
पर ये मत भूल वो ताज भी
हमे देखकर सर झुका लेता है ।।

आशीष पाण्डेय



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