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मेरे अल्फाज़

कयामत ढाती है

Ashish Pandey

232 कविताएं

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नजर जब भी उठाता हूँ
दिखे मुस्कान है उसकी
पलक गिरती है जब मेरी
शिकायत बढ़ती जाती हैं ।।

करूँ क्या तू बता प्यारे
बावरी दर्द देती है
नजर लड़ जाए जब उससे
कयामत मुझपे ढाती है।।

न जाने बल भरा कितना
शिकस्त हर कोई खाता है
न जाने जादू कैसा है
जो मन चक्कर लगाता है

- आशीष पाण्डेय

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