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मेरे अल्फाज़

नाम हमारा सुनोगे तो तुम यही कहोगे

Ashish Chauhan

1 कविता

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नाम हमारा सुनोगे तो तुम यही कहोगे,
ये शख्श नहीं ये नाम दीवाना लगता है।।

नाम तुम्हारे जो लिक्खे उन सब गीतों का,
अक्षर-अक्षर नाम तुम्हारा लगता है।।

खत तो तेरे नाम आज भी लिखता रहता हुँ,
तेरा नाम-पता लिखने में डर सा लगता है।।

नाम कमाने में खप जाती उम्र 'आशीष,'
नाम मिटाने में तो पल भर लगता है।।

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