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मेरे अल्फाज़

तूफ़ानो से नज़र मिला कर देख लिया

Arvind Singhania

194 कविताएं

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तूफ़ानो से, नज़र मिलाकर, देख लिया,
हर इक आफ़त से टकराकर, देख लिया !!

हो ज़ुनून, तो, आसमान भी झुकता है,
यह तो हमनें भी अज़माकर, देख लिया !!

चाँद को ड़र है आख़िर उसका क्या होगा?
जो हमनें ऊपर हाथ उठाकर, देख लिया !!

जिसे भी देखो, वही, घात लगाये बैठा है,
बहुत बार यह शीश झुकाकर, देख लिया !!

हर बार, उन्होंनें, पीठ में खंजर घौंपा है,
हर दुश्मन को गले लगाकर, देख लिया !!

उनके दिल में छल, फ़रेब और धोखा है,
हमनें, उनके ख़्वाब चुराकर, देख लिया !!

स्वर्ग–नरक सब कुछ, इसी दुनिया में हैं,
हमनें अपनी जान गंवाकर, देख लिया !!

रखनी पढ़ती है, यह जान हथेली पर,
सच्चाई का साथ निभाकर, देख लिया !!

उसके दर के सिवा नहीं सुनवाई कहीं,
दर-दर की, ठोकर खाकर, देख लिया !!

तेरी, मेरी, सुनने वाला कोई नहीं,
हमनें, ख़ूब गला बैठाकर, देख लिया !!

किसे पड़ी है, मेरे मन की बात सुने?
ऊपर तक गुहार लगाकर, देख लिया !!

कौन सुनेगा, सब के सब तो बहरे हैं?
हमनें, वर्षों शोर मचाकर, देख लिया !!

सिवा गमों के हाथ नहीं आया कुछ भी,
हमनें गहराई में भी जाकर, देख लिया !!

इश्क़ नें लेकिन जीना मुश्किल कर डाला,
हर तरहा दिल को बहलाकर, देख लिया !!

जाने क्या हो, दिल कुर्सी पर अटका है?
लाख इसे समझा-बुझाकर, देख लिया !!

दर्दे-दिल की दवा नहीं मिल पायी मगर,
हमनें हर इक तीर चलाकर, देख लिया !!

सम्मानों से पेट नहीं भरता ‘अरविन्द’
सम्मानों का, ढ़ेर लगाकर, देख लिया !!

© अरविन्द कुमार सिंहानिया


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