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मेरे अल्फाज़

बेटी से खुशहाल जीवन

Arvind Sharma

228 कविताएं

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कभी थी सोच बेटा से चलता परिवार
बेटे की चाहत में खुशी मनाते अपार।

बेटी के जन्म पर हो जाते थे सब उदास
समाज में करते थे उपहास
शिक्षा से दूर,घर पर रहने को मजबूर
स्कूल दूर हो या घर के आस-पास
विवाह के बाद चले जाना है घर से दूर।

अमीर हो या गरीब मज़दूर
बेटी हो रही हैं शिक्षित और मजबूत
बन पायलट,उड़ा रही हैं लड़ाकू विमान
देश सेवा के लिये जा रहीं है घर से दूर।

सितम्बर के चतुर्थ दिवस को मनाएं दिवस
बेटी को दे सम्मान,खुशी से बीतेगा जीवन।

सभी खुशी से मनाओ बेटी दिवस।

बेटी नहीं मांगती कोई हार,उपहार
बस मांगती है समाज में मिले स्थान
भाई व मां बाप दे असीम प्यार

- अरविन्द कुमार शर्मा
आगरा

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