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Aaj chupchap rane de

मेरे अल्फाज़

आज चुपचाप रहने दे

Arvind Agrawal

80 कविताएं

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न कर मुझसे गुफ्तगू आज चुपचाप रहने दे,
लबों को रख खामोश आँखों को बात करने दे II

मुश्किलों से मिले हैं कितने इंतज़ार के बाद,
फिसल रहा है वक़्त कुछ देर और साथ रहने दे II

जिंदगी गुजर रही थी तेज दरिया के मानिंद,
हक़ीक़त में मिलना है नामुमकिन ख्वाबों में तो रहने दे II

- अरविन्द कुमार अग्रवाल

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