मेरे अल्फ़ाज

                
                                                             
                            लम्हा लम्हा जोड़ा मैंने तब जाकर दास्तान बनी
                                                                     
                            
तिनका तिनका जोड़ा है तब जाकर आशियाना
करवट करवट बदली नींद तब जाकर कोई ख्वाब बुना
आसान नहीं था चुन लेना काँटो में से फूल नए
हथेलियों में चुभे हैं ना जाने कितने ही कांटे
तब जाकर ये हार बना
न जाने कितनी रातें काटी जगते हुए इन आँखों से
खयाल भी ये रखा कोई रूठ न जाये मेरी बातों से
गम छुपाकर खुशियां बांटी मेरा तब जाकर संसार बना
सब को रोका सबको साधा तब जाकर परिवार बना
मेरा घर संसार बना


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1 year ago

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