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मेरे अल्फाज़

प्रणय निवेदन

Archana Maheshwari

20 कविताएं

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किस तरह से पा लूं तुमको,
अपना कहीं बना लूं तुमको I
नीम शहद या खट्टा तीखा,
खुद मे कहीं मिला लूं तुमको ॥

तुम सावन हम पानी - पानी,
तुम कविता हम एक कहानी।
तुम मे हम हैं अक्षर - अक्षर,
इतना पाठ पढ़ा दूं तुमको ॥

जब -जब भोर करे सूर्यादय,
सब कुछ हो जाए मंगलमय ।
तुम हो या हो झलक तुम्हारी,
जो एक बार दिखला दूं तुमको ॥

गगन धरा नभ नील सजे सब,
अपना सब कुछ लगे यहाँ अब ।
घर भी मेरा.....तुम भी मेरी,
बून्द_बून्द बिखरा लूं तुमको ॥

इतनी पावन हो तुम कैसे,
लगती हो नवजात हो जैसे।
बिन छुई सी छुईमुई सी,
कैसे सब समझा दूं तुमको ॥

तुम मेरे अब हो जाओगे,
मुझमे मिलकर खो जाओगे ।
मेरे होकर..... मेरे रहना,
बस इतना सिखला दूं तुमको ॥

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