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मेरे अल्फाज़

एक आसमान में दो चाँद नहीं हुआ करते...

Aps Abhishek

3 कविताएं

502 Views
एक आसमान में
दो चाँद नहीं हुआ करते..
एक है भगवान
दूसरे को महान नहीं कहा करते...
ये एक सा हिंद,
लोग मजहबी हो सकते हैं,
यहां मजहब नहीं हुआ करते...
प्रकृति की हर बूंद से वाकिफ
ये हिन्द की मिट्टी है
एक तरह की मिट्टी में
कई गुण नहीं हुआ करते...
एक आसमान में
दो चाँद नहीं हुआ करते...
हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति को
मजहबी नहीं वैज्ञानिक पद्धति को
बयाँ करने वाले
वेद पुराण झुठ नहीं हुआ करते...
हिंद में जन्मा
हर जीव हिंदू है
हिंदू मुसलमा नहीं हुआ करते...
एक आसमान में
दो चाँद नहीं हुआ करते...

- अभिषेक प्रताप सिंह(ऐ पी एस)
  S/O श्री विनोद सिंह
  रुदौली, कन्नौज, उत्तर प्रदेश
  पिन- 209733
  9450769472

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