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मेरे अल्फाज़

कोशिश आख़िरी

Apratul Chandra

4 कविताएं

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कोशिश आख़िरी


कामयाब सैयाद की साज़िश आख़िरी l
फंदे में फँसे परिंदे की जुंबिश आख़िरी ll

मोहलत चंद लम्हों की हो जाये हासिल
मरते शख़्स की बस ख़्वाहिश आख़िरी ll

छोड़ गई ख़ुश्क जमीं और आँखे गीली
बरायेनाम बरसी है जो बारिश आख़िरी ll

मुहैया करा दें ज़हर खुदकुशी के लिए
सरकार से लोगों की गुज़ारिश आख़िरी ll

जनाज़े में होए शामिल दिलवर उसका
आशिक मांगे इतनी नवाज़िश आख़िरी ll

या रब मेरी शमा को सदा रोशन रखना
परवाने की खुदा से सिफारिश आख़िरी ll

कैसे बैठ जाएँ थक के राहों में अप्रतुल
जब तक है जां, बाकी कोशिश आख़िरी ll

सैयाद = बहेलिया, शिकारी


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