आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Eid ka Chand Aasmaan Se Utraa

मेरे अल्फाज़

ईद का चांद आसमान से उतरा

Aparna Pradhan

20 कविताएं

208 Views
ईद के चांद को
आसमान से उतरते देखा
धीरे से मेरी खिड़की पर आ बैठा
दस्तक दिए बिना ही अंदर आ गया
देख कर मन्द मन्द मुस्कुराने लगा
मुझे धीरे से स्पर्श कर के बोला
इतना हैरान क्यूं हो देख कर मुझे
रोज़ मुझे इसी खिड़की से
रात रात भर निहारती हो
जब पाख बदलता हूँ तो
बहुत उदास बेचैन हो जाती हो
कुछ रोज़ से खिड़की पर नहीं आईं
सोचा मिल कर हाल पूछ आऊं
रूबरू आ कर ईद की मुबारकबाद दे आऊं
तुम्हारे संग ईद का जश्न मनाऊं
चारों तरफ़ ख़ुशियाँ फैलाऊं
एक अरसे से मिलने की तमन्ना थी
हौसला भी मेरा बहुत बुलंद था
जैसे ही सितारों की आँख लगी
मैं चुपचाप वहाँ से भाग कर
तुमसे मिलने चला आया
सोचा एक ख़ूबसूरत रात
तुम्हारे नाम हो जाए
पास से तुम्हें भी जी भर निहारूं
तुम्हारे साथ कुछ समय बिताऊं
तन्हाई में हाल-ए-दिल सुनाऊं
कुछ तुम्हारे दिल की बात सुनूं
कुछ पल सुकून के तुम्हारे संग गुज़ारूं
सोच रहा हूँ हर साल तुम्हारे संग ईद मनाऊं

डा॰ अपर्णा प्रधान
मेरे शब्द मेरी पहचान
(स्वरचित, सर्वाधिकार सुरक्षित)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!