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मेरे अल्फाज़

अनन्त प्रेम परिकल्पना

Anurag srivastav

3 कविताएं

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ये मत कहना कि तेरा दीदार अच्छा लगता है
तू ये भी मत कहना कि तू यार अच्छा लगता है।
तू कुछ मत कह बस आंखे खुली रख मेरे दोस्त,
और आंखों से ही कह तेरा प्यार अच्छा लगता है.....

तेरे जुल्फों की साये में एक मकान चाहिए,
तेरे दिल का मुझको बड़ा आसमान चाहिए।
मैं चाहता हूं प्यार में मैं, मैं न रह तू हो जाऊं,
तुम चाहो की प्यार में तू, तू न रहे मैं हो जाऊं।
कश्मकश हमारी जिंदगी की एक दूजे से जुड़ी रहे,
मैं दिए में तेल सा रहू और तू मेरी बाती बन जाये।।

थक के जिंदगी से जब हम भभकने लगेंगे,
जिंदगी के आखरी सांस जब गिनने लगेंगे।।
साथ मिलकर रौशन किया कितने घरो को,
ये खुशी भी साथ लिए चलेंगे ..............

तू बने मेरी साथी हर जन्म में इस तरह.......
और हर बार खुशी से तेरा साथ दिया करेंगे......?

 अनुराग श्रीवास्तव


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