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मेरे अल्फाज़

पीछा करती आवाज़ें

Anupam Saxena

19 कविताएं

11 Views
जाने कैसी आवाज़ें हैं !
यह किसी का रूदन है
कि मां इसी तरह रोती थी

यह जो फिज़ा में मर्मस्पर्शी चीखें हैं
लगता है बलात्कारियों ने सामूहिक ब्लात्कार के बाद
लडकी को जला दिया है

यह बूढे बाप के रोने का स्वर है
जाने कहां-कहां भटकेगा न्याय के लिये

यह गोलियां चलने की आवाज़ें हैं
लगता है कुछ गिने चुने लोगों के लिये
निहत्थे किसानों को मारा जा रहा है
उनकी जमीन छीनी जा रही है

यह किसी के तालाब में कूदने की आवाज़ है
शायद कोई कैसर ग्रस्त युवा
या फिर बढ्ती उम्र की अनब्याही निर्धन कन्या
तालाब में कूद गई है

और यह तो किसी बच्चे के रोने की आवाज़ है
शायद कोई भूखा बच्चा
पास में सो रही मां के
निचुडे स्तनों से दूध न मिलने से रो रहा है

ये वह आवाज़ें है
जो वर्षों से मेरा पीछा कर रही हैं
मैं इनसे बहुत दूर निकल जाना चाहता हूं
पर ये आवाज़ें मुझे हर कहीं घेर लेती हैं


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