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मेरे अल्फाज़

आज बैठा हूँ उलझन में कैसे लिखते है कविता

Anuj Vishwakarma

1 कविता

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आज बैठा हूँ उलझन में कैसे लिखते है कविता !

शायद जीवन के बागानो से, अनुभव को चुनकर बनती है कविता!
जीवन की कटुता का जब मर्म झलकता तब बनती है कविता !
आज बैठा हूँ उलझन में कैसे लिखते है कविता !

जीवन हमें जो पथ सिखलाता उससे
होकर जाती है कविता !
जीवन की पृष्ठभूमि पर बिखरे मोतियों को पिरोकर बनती है कविता !
आज बैठा हूँ उलझन में कैसे लिखते है कविता !

भिन्न विचारों की धाराओ का जब मंथन होता तब बनती है कविता
बिषय-विशिष्ट पर जब हृदय भर आता तब उमड़ पडती है कविता
आज बैठा हूँ उलझन में कैसे लिखते है कविता !


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