आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Rajneetik Dohe

मेरे अल्फाज़

राजनीतिक दोहे

Anuj Kushwaha

5 कविताएं

299 Views
राजनीति में देख लो, ऐसे बैल हज़ार।
खाकर पैसा देश का, लेते नहीं डकार।।

राजनीति में आ गये, करते थे जो जाप।
दिया न इनको वोट तो, दे देंगे ये श्राप।।

राजनीति के खेल में, त्यागो तुम ईमान।
यहीं तरीक़ा है अगर, पाना है सम्मान।।

इस पार्टी में चोर जो, उस पार्टी में शाह।
अजब विरोधों से भरी, राजनीति की राह।।

नेताजी जब आ गये, करने यहाँ प्रचार।
लम्बा-सा मुंह खोलकर, वादे किए हज़ार।।

वादा अब तक एक भी, पूरा हुआ न यार।
आने को फिर से यहाँ, नेताजी तैयार।।

जनता कुछ आशा लिए, देती इनको वोट।
लेकिन ये सब जीतकर, गिनते केवल नोट।।

किया नहीं कुछ काम पर, पाना चाहें दाम।
ऐसे नेताओं! तुम्हें, सौ-सौ बार प्रणाम।।

लोकतंत्र का ताज यों, चाटे कब तक धूल।
भले न देना सूद तुम, दे दो केवल मूल।।

जीवन रूपी प्रात की, हो जाएगी शाम।
अगर बची हो शर्म कुछ, कर लो अब भी काम।।

तुमसे आशा एक ये, करता है यह देश।
पहनो वस्त्र विकास का, तज दो ढोंगी वेश।।



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!