ऐ जिंदगी ठहर जा जरा

                
                                                             
                            ऐ जिंदगी ठहर जा जरा,
                                                                     
                            
क्यूं पग-पग पर इम्तहान लेती है मेरा,
जर्रे-जर्रे से गुजर चल रहीं हूं तेरे साथ कि,
कल फिर निकलेगा नया सवेरा,
हर चुनौती से निपटने का हौंसला रखती हूं मैं तेरी,
बस अपने दस्तूरों को सहेजकर चल रही हूं इसलिए कम है रफ्तार मेरी।


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8 months ago
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