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मेरे अल्फाज़

बनारस और तुम

Anubhav Pratap

2 कविताएं

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तुमसे बिछड़कर वादिया शमशान हो गयी ,
पूरा तो कहा भी नहीं था के शाम हो गयी ।

मुड़कर देखा भी नहीं तुमने एक बार ,
गंगा की तरह निर्मल साफ हो गयीं ।

न जाने क्यों ऐसी बात हो गयी ,
मैं लंका रह गया तुम अस्सी घाट हो गयी ।

@anubhavpratap7

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