मैं कहता हूं सवाल कर

                
                                                             
                            मैं कहता हूं सवाल कर
                                                                     
                            
कृष्ण पर, काल पर
स्वयं के इस हाल पर
अंत से अनंत तक ,
हर धारणा नकार कर
मैं कहता हूं सवाल कर

अंक पर, आकार पर
पर्याय पर , प्रकार पर
उत्पत्ति से विनाश तक ,
हर वेद को नकार कर
मैं कहता हूं सवाल कर

सत्य पर , असत्य पर
आत्म पर , परमात्म पर
धर्म से अधर्म तक , द्रोण को नकार कर
मैं कहता हूं सवाल कर

परशु पर , पार्थ पर
पौरुष पर , पुरुषार्थ पर
ब्रह्मा से मीमांस तक ,
हर शास्त्र नकार कर
मैं कहता हूं सवाल कर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
1 month ago
Comments
X