दिल से मिले तो ...

                
                                                             
                            ....दिल से मिले तो फिर तो भगवान है दोस्ती...
                                                                     
                            

कभी जमीन तो कभी आसमान है दोस्ती,
आजाद परिंदों सी बेफिक्र उड़ान है दोस्ती,
पलकों पे सजी अनगिनत अरमान है दोस्ती,
हाथ की लकीरों को सजाती गुमान है दोस्ती,
न बुझने वाली आखों में चमकती आस है दोस्ती,
नसीबों से अंजाने में प्यारी मुलाकात है दोस्ती,
कभी चंचल महकती खिलती शाम है दोस्ती,
कभी खुशनुमा शीतल मधुर चांद है दोस्ती,
मन की गहराईयों को खोलती किवाड़ है दोस्ती,
हृदय के पन्नों को भांपती ऐसी जज्बात है दोस्ती,
दर्द को पढ़ने वाली अनकही आवाज है दोस्ती,
धूप छांव में खेलती बचपने की गवाह है दोस्ती,
तीर कमान सी कभी चुभती लाजवाब है दोस्ती,
गिले शिकवे तोड़ आलिंगन करती मिसाल है दोस्ती,
पक्की सच्ची नेक मिले तो अनमोल खान है दोस्ती,
अगर दिल से मिले तो फिर तो भगवान है दोस्ती।

अंशिता त्रिपाठी
लंदन

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
1 month ago
Comments
X