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मेरे अल्फाज़

है शिकायत किसको नहीं अपने नसीब से

anoop kumar

3 कविताएं

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है शिकायत किसको नहीं, अपने नसीब से।
कभी किसी को देखिऐ,जरा करीब से।।
ना खुश हैं जमी के परिदें,ना अासमां में उड़ने वाले।
हो गये हैं हालात, कुछ इतने अजीब से।।
खुदा की खुदाई पर भी,ना जाने कितने सवाल होंगे ।
कभी हाल-ऐ-जिऩ्दगी तो पूछिऐ, किसी गरीब से।।
दिल लगाना न दिललगी करना,था मशबरा उनके छलकते अश्कों का।।
राहे वफा में खाये थे चोट जो,अपने हबीब से।।
राहे जिन्दगी में संभलकर चलना,लूट ना ले काेई नादान तुमको।
लगते हैं राहबर भी यहां, कभी-कभी तो अजीज से।।

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