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मेरे अल्फाज़

बेवफा लोग ही अक्सर, वफा की बात करते हैं

anoop kumar

2 कविताएं

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बेवफा लोग ही अक्सर, वफा की बात करते हैं
इधर लूटते हैं सरेआम, उधर हिफाजत की बात करते हैं।।

गरजते हैं तड़कते हैं, बदगुमा होकर जो आसमां में
ऐसे बादल कहॉं, कभी बरसात करते हैं।।

वक्त बेजा ना कर, उनकी बीरान राहों में
बिछड़े जो दिल से एक बार, फिर कब मुलाकात करते हैं।।

हो जाते हैं एक दिन, बरबाद वो खुद भी
दूसरों के लिए दुआ जो, ये दिन रात करते हैं।।

पत्थरों से दिल्लगी का, यही अंजाम है नादान
टूट करके लोग एक दिन, खुद से सवालात करते हैं।।

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