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woman

मेरे अल्फाज़

नारी...

ankur srivastav

7 कविताएं

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अपनी देह में तेरा
निर्माण किया
अपनी गोद में
तुझे संवारा
पल-पल तेरा
ख़्याल रखा
तेरी खुशियों में ही
अपना संसार ढूंढा
तेरे दुख में
दुखी हुई
फिर तू एक दिन
इतना बड़ा हो गया
कि पूरी दुनिया को
मुझे ही कमज़ोर
बताने लगा

अंकुर श्रीवास्तव (सूरतगढ़,राजस्थान)
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