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मेरे अल्फाज़

आजाद परिंदे

Ankit Verma

8 कविताएं

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आज हम आजाद होते हुए भी गुलामी की जंजीरो में बंधे हुए है,उसी गुलामी की दास्ताँ बताती है ये कविता।

आजाद परिंदे...

आजाद परिंदे हैं,क्यों गुलाम बन कर जिए?
हम अपने राजा हैं, क्यों आवाम बन कर जिए?
क्यों बदनाम कर रहे हो उनकी कुर्बानी,
जिन्होंने अपनी नींदे छोड़ दी आपको सपने दिखाने के लिए।
जाना तो एक दिन सबको हैं दुनिया से,
क्यों न हर दिन कोई नेक काम कर जिए।
फूट डालो राज करो ये अंग्रजो की नीति थी,
हम क्यों अपने ही देशवासियों के हाथों मरे।
आजाद परिंदे हैं क्यों गुलाम बन कर जिए?
हम अपने राजा हैं क्यों आवाम बन कर जिए?
राम-राम ठीक था क्यों ज्यादा hi-hello
की तान में जिए,
अंग्रेजी सीखना अच्छा है,पर क्यों हम पानी
भी उसी के नाम का पिए।
आजाद हुए ताकि सब मिलकर साथ रहे,
फिर क्यों अपने आप को इन मोबाइलों से
जकड़ लिए।
Whatsapp, facebook सब खिलौने है
खेलने के लिए,
फिर क्यों अपनों से ज्यादा इन खिलौनों के
साथ जिए।
आजाद परिंदे है क्यों गुलाम बन कर जिए?
क्यों technology को राजा और खुद
को आवाम बना कर जिए।।

-अंकित कुमार
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