अधूरा इश्क़

                
                                                             
                            मैं तुझसे इश्क़ करता फिर रहा था इक जमाने मे
                                                                     
                            
तुझे मैंने खुदा समझा था अपना एक ज़माने में
मोहब्बत की तेरी तासीर अच्छी थी नहीं फिर भी
तेरी तारीफ करता फिर रहा था इक ज़माने में
अगर मुझसे मोहब्बत करती तू फगुनिया की तरह
मैं माँझी बनकर पर्वत तोड़ देता इस जमाने में
 
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2 months ago

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