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Mausam

मेरे अल्फाज़

मौसम

anita Srivastava

85 कविताएं

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नहीं ठहरता वक़्त कहीं पर,
मौसम का आना जाना है।
जब "सच" का सूरज तपिश बढाये,
रिश्तों मे गर्माहट भर लेना।
"प्रेम "फुहार पड़े धरा पर,
मन का कलुष मिटा लेना।
"आनंद" की ठंडी लहर चले,
तन मन पुलकित कर लेना।
जब" चहुँ दिश "बसंत बयार बहे,
जीवन मे हरियाली भर लेना।
नैसर्गिक है, मौसम का बदलना,
जीवन के रंग निराले है,
सुख दुख में सम भाव से,
मन को स्थिर कर लेना।

अनिता

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