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मेरे अल्फाज़

मत छूना मेरे तिरंगे को

anita Srivastava

84 कविताएं

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मत छूना मेरे तिरंगे को
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हाथ जिनके नापाक हो,दामन पे जिनके दाग हो
मत छूना मेरे तिरंगे को,गर पवित्रता का न मान हो।
स्वाभिमान से अपने वतन का अभिमान सजाया है
हम भारतीयों की आत्मा इसमें ,ये तिरंगा फहराया है।
नही डालना कुत्सित दृष्टि, तिरंगा हमारी शान है
ना आये कोई आंच इसपे ,तिरंगे से सजा हिन्दुस्तान है।
अपमानपूर्ण अमृत से अच्छा,सम्मान से विष पी जाए
स्वाभिमान से जिंदा रह, तिरंगा हम अमर कर जाए

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