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मेरे अल्फाज़

शलभ-सी प्रीत

Anita Mukesh

55 कविताएं

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चंद्रभानु को विभास का मूल्य बता,
तिमिर को राह दिखा रहे,
खारे मोतियों को थामे अँजुरी में,
परोपकार का हार पिरो रहे |

ज़माने का जतन नहीं,
कांस के खिले फूल फुसफुसा रहे,
मिलेंगे कँबल दान में,
इस बार ठंड को वे यों समझा रहे |

शलभ-सी प्रीत पिरोये हृदय में,
ऊँघती तड़प कलिकाल में मुस्कुरायी,
उम्मीद नयनों में ठहर,चराग़ जलेंगे,
पवन से यों गुस्ताख़ियाँ जता रहे |

नदी के तटबंध अधीर मन से सुगबुगाये,
बदली जो राह उसी राह पर थर्राते रहे,
शायद उद्गम मेरा मोड़ने अब,
नये ठेकेदार धीर मन से आ रहे |

चीरती हवा पीड़ा और पराजय को ,
मिथ्या-तृप्ति,भटकन समेटे समय को कचोटती रही,
बियाबान में ठंड के थपेड़ो से,
ठिठुरते कांस अस्तित्त्व अपना बता रहे |

अनीता सैनी


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